हेलो दोस्तों में ,राजकुमार मीणा और में आपके लिए लेकर आया हु Father and Son Emotional Story in Hindi जिसको पढ़ने पर दिल छुलेने वाली फिल्लिंग आती है कसम से बहुत हार्ट्यचिंग है ये स्टोरी

Father and Son Emotional Story in Hindi

Father’s Shoes Heart Touching Emotional Story in Hindi

बेटी नाराज हो गयी
पापा जाने लगे जब ऑफिस,
बेटी जिद पर अड़ी रही, activa के लिए, वो भी आज
papa ने मजबूरी दिखाई, पर बेटी माने तब न.
बेटी ने जिद में आकर papa से बात करना बंद कर दी.
पापा बेचारे क्या करे ?
बहुत कोशिश की, papa ने, ऑफिस से बेटी को मनाने
की,पर बेटी phone उठाये तब न.
mood ख़राब हुआ पापा का
छाती में दर्द होने लगा
immediate गया boss के पास, urgent loan पास
करवाया, showroom गया, बेटी की ख़ुशी के लिए,
activa खरीद ली.
बेटी को फिर फ़ोन किया ये बताने के लिए कि उसकी
activa शाम को आ रही है
पर बेटी अब भी नाराज
मुंह फूलाये बैठी थी, जिदी थी
papa से अब भी नाराज थी
पापा शांत हो गए, chest pain बढ़ने लगा,
बहुत प्यार करता था बेटी से
बेटी ने phone नहीं उठाया, और दर्द बढ़ने लगा.
activa तो पहुंच चुकी घर
पर papa को attack आ गया, ऑफिस में ही.
घर पर activa देखकर बहुत खुश हुई बेटी, हद से ज्यादा
पर पापा नहीं दिखे
पीछे पीछे कोई ambulance आ गयी,
सब परेशान, कौन था उसमें
Body बाहर निकाली गयी
बेटी ने देखा, वो papa थे.
ऑफिस staff ने बताया
सुबह से बहुत परेशान थे
activa के लिए, बेटी के लिए
urgent loan पास करवाके activa तक book की
घर पे बेटी को फ़ोन किया पर शायद बेटी नाराज थी
इसलिए फ़ोन नहीं उठाया
ये upset हो गए, बेटी से
बहुत प्यार करते थे
phone न उठाने के कारण उसे chest pain होने लगा,
कुछ ही sec में वही लेट गए
वही पर ढेर हो गए।
सोचिये, उस वक़्त बेटी की क्या हालत हुई होगी
जार जार रो रही थी
माफ़ कर दो पापा, बहुत बड़ी गलती हो गयी मुझसे
मुझे नहीं पता, पापा, आप इस बेटी को बहुत प्यार करते
हो, माफ़ कर दो पापा.
पर अब क्या हो सकता था ?
ACtiva बाहर खड़ी थी
PApa की dead body भी वहीं थी
बेटी सिर्फ पछता सकती थी, अपनी ज़िद पर, पापा से
नाराज होकर.
काश, वो फ़ोन उठाती
तो papa आज जिन्दा होते
हर बच्चे चाहे वो बेटा हो या बेटी से request है कि
dad की salary देखिये, घर की income देखिये, घर ijjat की देखिये
आप जो डिमांड करते हो jaruri nahi woh Ap ko dene me
क्या आपके पापा कैपेबल हैं, chahe woh activa नहीं ho ya kuch aur तो थोड़ा सब्र कीजिये
पापा कभी भी बच्चों की बातें #__ignore नहीं करते ।
I Love papa ji

पछतावा Heart Touching Hindi Story

…पापा मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो ,

..आँसू छिपाते हो फेर कर नज़रे,
..इतना फीका मुस्कुराया न करो ..पापा मुझे छोड़ने आया न करो
… हिदायत से घर भर की लाइट्स बुझाते ,
… सोच कर भी न कितने सामान खरीदते ,
…गाड़ी का माइलेज चेक करते रहते ,
…मेरे हाथ में ए टी एम थमाया न करो … पापा मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो ।
…पानी की बॉटल रखी या नही,
…टिकट कही भूली तो नही ,
…पर्स में खुले पैसे रखे या नही
..इतना नम प्यार जताया न करो ….पापा मुझे छोड़ने आया न करो ।
सीट के नीचे बैग जमाते ,
ध्यान रखना अकेली जा रही,
साथ की किसी महिला को बताते,
पल पल इतनी चिंता जताया न करो …पापा मुझे छोड़ने आया न करो ।
पहुँचते ही कर देना फोन ,
अब कब होगा आना फिर तुम्हारा ,
रग रग कर देते हो तन्हा ,
उदासी से सर पर हाथ फिराया न करो ..आप स्टेशन आया न करो ।
मैं खामोश रीती हो जाती ,
जी भर ऐसे गले लगाया न करो ,
दूर तक देखती रह जाती हूँ बिखर कर,
ग़मगीन खड़े यू हाथ हिलाया न करो ,.. …..आप स्टेशन आया न करो ।
चप्पा चप्पा कर देते हो वीरान ,
रुन्धा गला बातो में छिपाया न करो,
मेरा आगा पीछा सोच सोच ,
अपना कलेजा दुखाया न करो,…… मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो ।
फ़ोन पे बात न सूझती आपको,
लो अपनी माँ से बात करो ,
बाद में पूछते उनसे ब्यौरा सारा ,
हमारे नाम पाई पाई के कागज़ बनवाया न करो…. आप स्टेशन आया न करो

 

भक्तो तुम्हारे पापा से 10 सवाल जबाब जरुर बताना- –
1. किसानों पर गोली क्यों चलाई? –
2. कर्जमाफी क्यों नहीं की? –
3. समर्थन मूल्य क्यों नही दिया ? –
4. किसान आत्महत्या क्यों बढी ? –
5. फ़सल बीमा के नाम पर क्यों लूटा? –
6. भावान्तर का लाभ किसे मिला ? –
7. किसानों को निर्वस्त्र क्यों किया? –
8. दो करोड़ नौकरियां क्यों नहीं दिया? –
9. 15 लाख खाते में क्यों नहीं भेजा? –
10. बैंकचोरों को क्यों भगाया?

 

 

पापा आफिस में पहुंचे ही थे कि स्कूल से फोन आया!

सुरीली आवाज में एक मैम बोलीं –
“सर! आप की बेटी जो सेकंड क्लास में है,
मैं उसकी क्लास टीचर बोल रहीं हूँ।
आज पैरंट्स टीचर मीटिंग है। रिपोर्ट कार्ड दिखाया जाएगा।
आप अपनी बेटी के साथ टाईम से पहुंचें।”..

बेचारे पापा क्या करते।
आदेश के पाबंद… तुरंत छुट्टी लेकर, घर से बेटी को लेकर स्कूल पहुंच गए।

सामने गुलाबी साड़ी पहने,छोटी सी बिंदी लगाए, नयी उम्र की, गोरी सी लेकिन बेहद तेज मैम बैठी थी।

पापा कुछ बोल पाते कि इससे पहले लगभग डांटते हुए बोलीं -” आप अभी रुकिए, मैं आप से अलग बात करूंगी।”

पापा ने बेटी की तरफ देखा, और दोनों चुपचाप पीछे जाकर बैठ गए।

“मैम बहुत गुस्से में लगती हैं” – बेटी ने धीरे से कहा। “तुम्हारा रिपोर्ट कार्ड तो ठीक है” – उसी तरह पापा भी धीरे से बोले। “पता नहीं पापा, मैंने तो देखा नहीं। “-बेटी ने अपना बचाव किया। “मुझे भी लगता है, आज तुम्हारी मैम तुम्हारे साथ मेरी भी क्लास लेंगी।” – पापा खुद को तैयार करते हुए बोले।

वो दोनों आपस में फुसफुसा ही रहे थे कि तभी मैम खाली होकर बोलीं – “हाँ! अब आप दोनों भी आ जाइए।

पापा किसी तरह उस शहद भरी मिर्ची सी आवाज के पास पहुंचे। और बेटी पापा के के पीछे छुप कर खड़ी हो गई।

मैम- देखिए! आप की बेटी की शिकायत तो बहुत है लेकिन पहले आप इसकी परीक्षा की कापियां और रिपोर्ट देखिए। और बताइए इसको कैसे पढ़ाया जाये।
… मैम ने सारांश में लगभग सारी बात कह दी..
मैम- पहले इंग्लिश की कापी देखिए.. फेल है आप की बेटी।

… पापा ने एक नजर बेटी को देखा, जो सहमी सी खड़ी थी.. फिर मुस्कुरा कर बोले…
पापा – अंग्रेजी एक विदेशी भाषा है। इस अम्र में बच्चे अपनी ही भाषा नहीं समझ पाते।

… इतना मैम को चिढ़ने के लिए काफी था…
मैम- अच्छा! और ये देखिए! ये हिंदी में भी फेल है। क्यों?

… पापा ने फिर बेटी की तरफ देखा.. मानो उसकी नजरें साॅरी बोल रहीं हों…

पापा – हिंदी एक कठिन भाषा है। ध्वनि आधारित है। इसको जैसा बोला जाता है, वैसा लिखा जाता है। अब आप के इंग्लिश स्कूल में कोई शुद्ध हींदी बोलने वाला नहीं होगा…

…..पापा की बात मैम बीच में काटते हुए बोलीं…
मैम – अच्छा… तो आप और बच्चों के बारे में क्या कहेंगे जो….

इस बार पापा ने मैम की बात काट कर बोले..
पापा – और बच्चे क्यों फेल हुए ये मैं नहीं बता सकता… मै तो….

मैम चिढ़ते हुए बोली – “आप पूरी बात तो सुन लिया करो, मेरा मतलब था कि और बच्चे कैसे पास हो गये…” फेल नहीं”…

अच्छा छोड़ो ये दूसरी कापी देखो आप। आज के बच्चे जब मोबाइल और लैपटॉप की रग रग से वाकिफ हैं तो आप की बच्ची कम्प्यूटर में कैसे फेल हो गई?

…. पापा इस बार कापी को गौर से देखते हुए, गंभीरता से बोले – “ये कोई उम्र है कम्प्यूटर पढ़ने और मोबाइल चलाने की। अभी तो बच्चों को फील्ड में खेलना चाहिए।

… मैम का पारा अब सातवें आसमान पर था… वो कापियां समेटते हुए बोली-” सांइस की कापी दिखाने से तो कोई फायदा है नहीं। क्योंकि मैं भी जानती हूँ कि अल्बर्ट आइंस्टीन बचपन फेल होते थे।”

… पापा चुपचाप थे…

मैम ने फिर शिकायत आगे बढ़ाई – “ये क्लास में डिस्पलिन में नहीं रहती, बात करती है, शोर करती है, इधर-उधर घूमती है।

पापा ने मैम को बीच में रोक कर, खोजती हुई निगाह से बोले…

पापा – वो सब छोड़िए! आप कुछ भूल रहीं हैं। इसमें गणित की कापी कहां है। उसका रिजल्ट तो बताइए।

मैंम-(मुंह फेरते हुए) हां, उसे दिखाने की जरूरत नहीं है।

पापा – फिर भी, जब सारी कापियां दिखा दी तो वही क्यों बाकी रहे।

मैम ने इस बार बेटी की तरफ देखा और अनमने मन से गणित की कापी निकाल कर दे दी।

…. गणित का नम्बर, और विषयों से अलग था…. 100%…..
मैम अब भी मुंह फेरे बैठी थीं, लेकिन पापा पूरे जोश में थे।

पापा – हाँ तो मैंम, मेरी बेटी को इंग्लिश कौन पढ़ाता है?
:
मैम- (धीरे से) मैं!
:
पापा – और हिंदी कौन पढ़ाता है?
:
मैम- “मै”
:
पापा – और कम्प्यूटर कौन पढ़ाता है?
:
मैम- वो भी “मैं”
:
पापा – अब ये भी बता दीजिए कि गणित कौन पढ़ाता है?
:
मैम कुछ बोल पाती, पापा उससे पहले ही जवाब देकर खड़े हो गए…
पापा – “मैं”…
:
मैम – (झेंपते हुए) हां पता है।
:
पापा- तो अच्छा टीचर कौन है????? दुबारा मुझसे मेरी बेटी की शिकायत मत करना। बच्ची है। शरारत तो करेगी ही।
:
मैम तिलमिला कर खड़ी हो गई और जोर से बोलीं-“””मिलना तुम दोनों आज घर पर, दोनों बाप बेटी की अच्छे से खबर लेती हूं”””!!!

 

“पापा ये ना स्कूल में राेज पिटता है, इसकी मैम ने कहा
ये तुम्हे बताने काे” ये बाेल कर बहन ताे भाग गई पर पापा ने भाई काे
बहुत मारा। इतनी मार लगाई के भाई दर्द के मारे राेने
लगा। राेता राेता भाई कमरे में आया ताे बहन, भाई की
तरफ देखने लगी।
भाई उसे देख कर राेने लगा आैर बाेला खुश है तू अब हना, मुझे
पिटवा कर। भाई के गाल पर उंगलियां छपी देख बहन
भाई के दर्द काे महसूस कर राेने लगी आैर भाई के पास
आ कर कहने लगी “मुझे माफ कर दे भईया मुझे
नही पता था की, पापा तुझे मारेगे” ये सुनते
ही भाई घुस्सा हाे गया आैर बहन से चिल्ला कर बाेला
“दूर हट जा मुझसे” राेती हुई बहन भाई
की तेज अावाज सुन डर गई, जिससे की
बहन के हाथ में लगा टी वी का रिमाेर्ट गिर
गया। रिमाेर्ट जमीन पर गिरते ही टूट गया।
ये देखते ही भाई हँस गया आैर आँसू पाैंछ के बहन
से बाेला “बडा मजा आया ना मुझे पिटवा कर, अब तू बच
अभी भुलाता हूँ पापा काे रूक, पापा देखाे ये क्या” भाई
की बात सुन बहन काँप गई, आैर भाई के पास अाकर
कहने लगी “भाई मत बुला पापा काे बहुत मारेंगे पापा,
भाई प्लीज भाई” बहन के आँसू देख भाई चुप हाे गया,
के तभी पापा आ गए। पापा ने देखा के रिमाेर्ट
जमीन पर टूट पडा था, आैर भाई बहन साथ खडे थे,
देखते ही पापा ने पूछा किसने ताेडा रिमाेर्ट बताआे, भाई ने
बहन की तरफ देखा, बहन काे डरके मारे काँपता देख
भाई हँस गया आैर पापा से कहा की “ज्यादा इतरा
रही थी मेरे पिटने पर मैने रिमाेर्ट
ही रख दिया एक घुमा कर।”
ये सुनते ही पापा ने भाई काे फिर बहुत मारा, पिट पिटा
कर भाई दर्द से करहाता हुआ गिर कर चुप लेटा रह गया। ये देख
बहन ने अा कर भाई काे उठाया आैर सीने से लग राेने
लगी। कहने लगी भाई क्यू पिटा तू मेरे
लिए, ताेडा ताे मैने था ना।
भाई हँसा आैर कहा “पापा बहुत तेज मारते है थप्पड़ चुल्लू तू
सह नही पाती। वैसे भी मैने
साेचा बारह तेरह थप्पड़ खा ही लिए है ताे थाेडे आैर
सही, क्यू दाे तीन थप्पड़ खिला कर तुझे
तेरा अहसान लूँ। भाई की ये बाते सुन बहन राेने
लगी कहने लगी “भईया मैम एक
महीने से कह रही थी,
तुम्हारे बारे में पापा काे बताने के लिए, पर मैने आज तक
नही बताया। पर कल स्कूल में मैडम ने बाेला था, के पापा
काे तुम्हारे बारे में ना बता कर मैं तुम्हारी
जिंदगी खराब कर रही हूँ, अपने भाई
की जिंदगी खराब करने की
कही मैं वजह ना बन जाऊ ये साेच मैं डर गई,
तुम्हारी जिंदगी नही बिगाडना
चाहती थी मैं इसलिए मैने पापा काे बताया
ताकी वाे तुम्हे पढने के लिए समझाए, पर मैं तुम्हे
पिटवाना नही चाहती थी
भईया।
भाई ये सुन चुप हाे गया, आैर बहन काे कुछ यूँ गले लगा कर बाेला
चल छाेड हैप्पी रक्षा बंधन।।।।।
सच में बहुत अनमोल है भाई बहन का रिश्ता।।

 

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये है?
माँ मेरा मन बात ये समझ ना पाये है,
ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।
पहले पापा मुन्ना मुन्ना कहते आते थे,
टॉफियाँ खिलोने साथ में भी लाते थे।
गोदी में उठा के खूब खिलखिलाते थे,
हाथ फेर सर पे प्यार भी जताते थे।
पर ना जाने आज क्यूँ वो चुप हो गए,
लगता है की खूब गहरी नींद सो गए।
नींद से पापा उठो मुन्ना बुलाये है,
ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।
फौजी अंकलों की भीड़ घर क्यूँ आई है,
पापा का सामान साथ में क्यूँ लाई है।
साथ में क्यूँ लाई है वो मेडलों के हार ,
आंख में आंसू क्यूँ सबके आते बार बार।
चाचा मामा दादा दादी चीखते है क्यूँ,
माँ मेरी बता वो सर को पीटते है क्यूँ।
गाँव क्यूँ शहीद पापा को बताये है,
ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।
माँ तू क्यों है इतना रोती ये बता मुझे,
होश क्यूँ हर पल है खोती ये बता मुझे।
माथे का सिन्दूर क्यूँ है दादी पोछती,
लाल चूड़ी हाथ में क्यूँ बुआ तोडती।
काले मोतियों की माला क्यूँ उतारी है,
क्या तुझे माँ हो गया समझना भारी है।
माँ तेरा ये रूप मुझे ना सुहाये है,
ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।
पापा कहाँ है जा रहे अब ये बताओ माँ,
चुपचाप से आंसू बहा के यूँ सताओ ना।
क्यूँ उनको सब उठा रहे हाथो को बांधकर,
जय हिन्द बोलते है क्यूँ कन्धों पे लादकर।
दादी खड़ी है क्यूँ भला आँचल को भींचकर,
आंसू क्यूँ बहे जा रहे है आँख मींचकर।
पापा की राह में क्यूँ फूल ये सजाये है,
ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।
क्यूँ लकड़ियों के बीच में पापा लिटाये है,
सब कह रहे है लेने उनको राम आये है।
पापा ये दादा कह रहे तुमको जलाऊँ मैं,
बोलो भला इस आग को कैसे लगाऊं मैं।
इस आग में समा के साथ छोड़ जाओगे,
आँखों में आंसू होंगे बहुत याद आओगे।
अब आया समझ माँ ने क्यूँ आँसू बहाये थे,
ओढ़ के तिरंगा पापा घर क्यूँ आये थे ।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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*मेरे_पापा_की_औकात*
पाँच दिन की छूट्टियाँ बिता कर जब ससुराल पहुँची तो पति घर के सामने स्वागत में खड़े थे।
अंदर प्रवेश किया तो छोटे से गैराज में चमचमाती गाड़ी खड़ी थी स्विफ्ट डिजायर!
मैंने आँखों ही आँखों से पति से प्रश्न किया तो उन्होंने गाड़ी की चाबियाँ थमाकर कहा:-“कल से तुम इस गाड़ी में कॉलेज जाओगी प्रोफेसर साहिबा!”
“ओह माय गॉड!!”
ख़ुशी इतनी थी कि मुँह से और कुछ निकला ही नही। बस जोश और भावावेश में मैंने तहसीलदार साहब को एक जोरदार झप्पी देदी और अमरबेल की तरह उनसे लिपट गई। उनका गिफ्ट देने का तरीका भी अजीब हुआ करता है।
सब कुछ चुपचाप और अचानक!!
खुद के पास पुरानी इंडिगो है और मेरे लिए और भी महंगी खरीद लाए।
6 साल की शादीशुदा जिंदगी में इस आदमी ने न जाने कितने गिफ्ट दिए।
गिनती करती हूँ तो थक जाती हूँ।
ईमानदार है रिश्वत नही लेते । मग़र खर्चीले इतने कि उधार के पैसे लाकर गिफ्ट खरीद लाते है।
लम्बी सी झप्पी के बाद मैं अलग हुई तो गाडी का निरक्षण करने लगी। मेरा फसन्दीदा कलर था। बहुत सुंदर थी।
फिर नजर उस जगह गई जहाँ मेरी स्कूटी खड़ी रहती थी।
हठात! वो जगह तो खाली थी।
“स्कूटी कहाँ है?” मैंने चिल्लाकर पूछा।
“बेच दी मैंने, क्या करना अब उस जुगाड़ का? पार्किंग में इतनी जगह भी नही है।”
“मुझ से बिना पूछे बेच दी तुमने??”
“एक स्कूटी ही तो थी; पुरानी सी। गुस्सा क्यूँ होती हो?”
उसने भावहीन स्वर में कहा तो मैं चिल्ला पड़ी:-“स्कूटी नही थी वो।
मेरी जिंदगी थी। मेरी धड़कनें बसती थी उसमें। मेरे पापा की इकलौती निशानी थी मेरे पास।
मैं तुम्हारे तौफे का सम्मान करती हूँ मगर उस स्कूटी के बिना पे नही। मुझे नही चाहिए तुम्हारी गाड़ी। तुमने मेरी सबसे प्यारी चीज बेच दी। वो भी मुझसे बिना पूछे।'”
मैं रो पड़ी।
शौर सुनकर मेरी सास बाहर निकल आई।
उसने मेरे सर पर हाथ फेरा तो मेरी रुलाई और फुट पड़ी।
“रो मत बेटा, मैंने तो इससे पहले ही कहा था।
एक बार बहु से पूछ ले। मग़र बेटा बड़ा हो गया है।
तहसीलदार!! माँ की बात कहाँ सुनेगा?
मग़र तू रो मत।
और तू खड़ा-खड़ा अब क्या देख रहा है वापस ला स्कूटी को।”
तहसीलदार साहब गर्दन झुकाकर आए मेरे पास।
रोते हुए नही देखा था मुझे पहले कभी।
प्यार जो बेइन्तहा करते हैं।
याचना भरे स्वर में बोले:- सॉरी यार! मुझे क्या पता था वो स्कूटी तेरे दिल के इतनी करीब है। मैंने तो कबाड़ी को बेचा है सिर्फ सात हजार में। वो मामूली पैसे भी मेरे किस काम के थे? यूँ ही बेच दिया कि गाड़ी मिलने के बाद उसका क्या करोगी? तुम्हे ख़ुशी देनी चाही थी आँसू नही। अभी जाकर लाता हूँ। ”
फिर वो चले गए।
मैं अपने कमरे में आकर बैठ गई। जड़वत सी।
पति का भी क्या दोष था।
हाँ एक दो बार उन्होंने कहा था कि ऐसे बेच कर नई ले ले।
मैंने भी हँस कर कह दिया था कि नही यही ठीक है।
लेकिन अचानक स्कूटी न देखकर मैं बहुत ज्यादा भावुक हो गई थी। होती भी कैसे नही।
वो स्कूटी नही #”औकात” थी मेरे पापा की।
जब मैं कॉलेज में थी तब मेरे साथ में पढ़ने वाली एक लड़की नई स्कूटी लेकर कॉलेज आई थी। सभी सहेलियाँ उसे बधाई दे रही थी।
तब मैंने उससे पूछ लिया:- “कितने की है?
उसने तपाक से जो उत्तर दिया उसने मेरी जान ही निकाल ली थी:-” कितने की भी हो? तेरी और तेरे पापा की औकात से बाहर की है।”
अचानक पैरों में जान नही रही थी। सब लड़कियाँ वहाँ से चली गई थी। मगर मैं वही बैठी रह गई। किसी ने मेरे हृदय का दर्द नही देखा था। मुझे कभी यह अहसास ही नही हुआ था कि वे सब मुझे अपने से अलग “गरीब”समझती थी। मगर उस दिन लगा कि मैं उनमे से नही हूँ।
घर आई तब भी अपनी उदासी छूपा नही पाई। माँ से लिपट कर रो पड़ी थी। माँ को बताया तो माँ ने बस इतना ही कहा” छिछोरी लड़कियों पर ज्यादा ध्यान मत दे! पढ़ाई पर ध्यान दे!”
रात को पापा घर आए तब उनसे भी मैंने पूछ लिया:-“पापा हम गरीब हैं क्या?”
तब पापा ने सर पे हाथ फिराते हुए कहा था”-हम गरीब नही हैं बिटिया, बस जरासा हमारा वक़्त गरीब चल रहा है।”
फिर अगले दिन भी मैं कॉलेज नही गई। न जाने क्यों दिल नही था। शाम को पापा जल्दी ही घर आ गए थे। और जो लाए थे वो उतनी बड़ी खुशी थी मेरे लिए कि शब्दों में बयाँ नही कर सकती। एक प्यारी सी स्कूटी। तितली सी। सोन चिड़िया सी। नही, एक सफेद परी सी थी वो। मेरे सपनों की उड़ान। मेरी जान थी वो। सच कहूँ तो उस रात मुझे नींद नही आई थी। मैंने पापा को कितनी बार थैंक्यू बोला याद नही है। स्कूटी कहाँ से आई ? पैसे कहाँ से आए ये भी नही सोच सकी ज्यादा ख़ुशी में। फिर दो दिन मेरा प्रशिक्षण चला। साईकिल चलानी तो आती थी। स्कूटी भी चलानी सीख गई।
पाँच दिन बाद कॉलेज पहुँची। अपने पापा की “औकात” के साथ। एक राजकुमारी की तरह। जैसे अभी स्वर्णजड़ित रथ से उतरी हो। सच पूछो तो मेरी जिंदगी में वो दिन ख़ुशी का सबसे बड़ा दिन था। मेरे पापा मुझे कितना चाहते हैं सबको पता चल गया।
मग़र कुछ दिनों बाद एक सहेली ने बताया कि वो पापा के साईकिल रिक्सा पर बैठी थी। तब मैंने कहा नही यार तुम किसी और के साईकिल रिक्शा पर बैठी हो। मेरे पापा का अपना टेम्पो है।
मग़र अंदर ही अंदर मेरा दिमाग झनझना उठा था। क्या पापा ने मेरी स्कूटी के लिए टेम्पो बेच दिया था। और छः महीने से ऊपर हो गए। मुझे पता भी नही लगने दिया।
शाम को पापा घर आए तो मैंने उन्हें गोर से देखा। आज इतने दिनों बाद फुर्सत से देखा तो जान पाई कि दुबले पतले हो गए है। वरना घ्यान से देखने का वक़्त ही नही मिलता था। रात को आते थे और सुबह अँधेरे ही चले जाते थे। टेम्पो भी दूर किसी दोस्त के घर खड़ा करके आते थे।
कैसे पता चलता बेच दिया है।
मैं दौड़ कर उनसे लिपट गई!:-“पापा आपने ऐसा क्यूँ किया?” बस इतना ही मुख से निकला। रोना जो आ गया था।
” तू मेरा ग़ुरूर है बिटिया, तेरी आँख में आँसू देखूँ तो मैं कैसा बाप? चिंता ना कर बेचा नही है। गिरवी रखा था। इसी महीने छुड़ा लूँगा।”
“आप दुनिया के बेस्ट पापा हो। बेस्ट से भी बेस्ट।इसे सिद्ध करना जरूरी कहाँ था? मैंने स्कूटी मांगी कब थी?क्यूँ किया आपने ऐसा? छः महीने से पैरों से सवारियां ढोई आपने। ओह पापा आपने कितनी तक़लीफ़ झेली मेरे लिए ? मैं पागल कुछ समझ ही नही पाई ।” और मैं दहाड़े मार कर रोने लगी। फिर हम सब रोने लगे। मेरे दोनों छोटे भाई। मेरी मम्मी भी।
पता नही कब तक रोते रहे ।
वो स्कूटी नही थी मेरे लिए। मेरे पापा के खून से सींचा हुआ उड़नखटोला था मेरा। और उसे किसी कबाड़ी को बेच दिया। दुःख तो होगा ही।
अचानक मेरी तन्द्रा टूटी। एक जानी-पहचानी सी आवाज कानो में पड़ी। फट-फट-फट,, मेरा उड़नखटोला मेरे पति देव यानी तहसीलदार साहब चलाकर ला रहे थे। और चलाते हुए एकदम बुद्दू लग रहे थे। मगर प्यारे से बुद्दू। मुझे बेइन्तहा चाहने वाले राजकुमार बुद्दू.

 

पापा पापा मुझे चोट लग गई खून आ रहा है

5 साल के बच्चे के मुँह से सुनना था
कि पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर
गोदी में उठाकर एक किलो मीटर की दूरी पर क्लिनिक तक भाग भाग कर ही पहुँच गए

दुकान कैश काउंटर सब नौकर के भरोसे छोड़ आये

सीधा डाक्टर के केबिन में दाखिल होते हुए डॉक्टर को बोले
देखिये देखिये डॉक्टर
मेरे बेटे को क्या हो गया

डॉक्टर साहब ने देखते हुए कहा
अरे भाई साहब घबराने की कोई बात
है मामूली चोट है…. ड्रेसिंग कर दी है
ठीक हो जायेगी।

डॉक्टर साहब कुछ पेन किलर लिख देते दर्द कम हो जाता । अच्छी से अच्छी दवाईया लिख देते ताकि
जल्दी ठीक हो जाये घाव भर जाये
*डाक्टर* अरे भाई साहब क्यों इतने परेशान हो रहे हो कुछ नहीं हुआ है
3-4दिन में ठीक हो जायेगा

पर डॉक्टर साहब इसको रात को नींद तो आजायेगी ना ।
*डॉक्टर* अरे हाँ भाई हाँ आप चिंता मत करो। बच्चे को लेकर लौटे तो नौकर बोला सेठ जी आपका ब्रांडेड महंगा शर्ट खराब हो गया खून लग गया अब
ये दाग नही निकलेंगे

*भाई साहब* कोई नहीं
ऐसे शर्ट बहुत आएंगे जायेंगे मेरे बेटे का खून बह गया वो चिंता खाये जा रही है कमजोर नहीं हो जाये । तू जा एक काम कर थोड़े सूखे मेवे फ्रूट ले आ इसे खिलाना पड़ेगा और मैं चलता हूँ घर पर

*40 साल बाद*

दुकान शोरूम में तब्दील हो गई है

भाई साहब का बेटा बिज़नस बखूबी संभाल रहा है
भाई साहब रिटायर्ड हो चुके हैं घर पर ही रहते है
तभी घर से बेटे की बीवी का फोन आता है

*बीवी*📞अजी सुनते हो ये आपके पापा पलंग से गिर गए हैं
सर पर से खून आ रहा है

*लड़का*📱 अरे यार ये पापा भी न
इनको बोला ह जमीन पर सो जाया करो पर मानते हीे नही पलंग पर ही सोते है

अरे रामु काका जाओ तो घर पर पापा को डॉक्टर अंकल के पास ले कर आओ मैं मिलता हूँ वहीँ पर।

बूढ़े हो चुके रामु काका चल कर धीरे धीरे घर जाते है
तब तक सेठजी का काफी खून बह चुका था

बहु मुँह चढ़ा कर बोली
ले जाओ जल्दी पूरा महंगा कालीन खराब हो गया है

काका जैसे तैसे जल्दी से रिक्शा में सेठजी को डाल कर
क्लीनिक ले गए

बेटा अब तक नही पंहुचा था
काका ने फोन किया तो बोला
अरे यार वो कार की चाबी नही मिल रही थी अभी मिली है
थोड़े कस्टमर भी है आप बैठो लेकर मैं आता हूँ

जो दूरी 40 साल पहले एक बाप ने
बेटे के सर पर खून देखकर 10 मिनट में बेटे को गोदी में उठा कर भाग कर तय कर ली थी

बेटा 1घन्टा 10 मिनट में कार से भी तय नही कर पाया था

डाक्टर ने जैसे ही भाई साहब को देखा उनको अंदर ले गए इलाज चालू किया
तब तक बेटा भी पहुँच गया
डॉक्टर अंकल बोले
बेटे खून बहुत बह गया है
एडमिट कर देते तो ठीक रहता

*बेटा* अरे कुछ नही डाक्टर साहब
आप ड्रेसिंग कर दो ठीक हो जायेगा
2-4 दिन में ।

डाक्टर अंकल बोले ठीक है कुछ दवाईया लिख देता हूँ थोड़ी महंगी है लेकिन आराम जल्दी हो जायेगा

*लड़का* अरे डॉक्टर अंकल चलेगा 4-5 दिन ज्यादा लगेंगे तो अब इतनी महंगी दवाइयो की क्या जरूरत । चलो मुझे निकलना पड़ेगा शोरूम पर कोई नहीं है ।

ये सुनते ही डॉक्टर अंकल के सब्र का बांध टूट गया
और 40 साल पहले की घटना पूरी सुनाई

बेटे की आँखों आंसू बहने लगे उसे बहुत पस्च्याताप हुआ।

तभी बहू का फोन आया
वो महंगा कालीन खराब हो गया है
क्या करूँ ।

बेटा बोला कालीन ही खराब हुआ है ना …..
नया आजायेगा
तुम पलंग पर नया चद्दर और गद्दा डालो मैँ पापा को ले कर आ रहा हूँ

भाई साहब के आँखों में आँसू थे
और ये ख़ुशी के थे

चोट का दर्द गायब था बेटे
के अपनेपन ने सब भुला दिया।

बस अब तो मौत भी आ जाये तो
मंजूर है ।

दोस्तों ये आज की सच्चाई है
आज हमारे अंदर का इंसान मर चुका है ।

माँ बाप अकेलेपन का जीवन जी
रहे हैं

और

बेटा कामयाबी और दौलत
की चकाचौंध में खो कर सब कुछ भूल चुका है ।
==========================
*`कहानी दिल को छुए तो दोस्तों को जरुर शेयर करे ।*

 

 

”पापा वैभव बहुत अच्छा है …
मैं उससे ही शादी करूंगी..
वरना !! ‘

पापा ने बेटी के ये शब्द सुनकर एक घडी को
तो सन्न रह गए .
फिर सामान्य होते हुए बोले -‘
ठीक है पर पहले मैं
तुम्हारे साथ मिलकर उसकी परीक्षा लेना चाहता हूँ तभी
होगा तुम्हारा विवाह वैभव से…
कहो मंज़ूर है ?
‘बेटी चहकते हुए
बोली -”हाँ मंज़ूर है मुझे ..

वैभव से अच्छा जीवन साथी कोई हो
ही नहीं सकता..
वो हर परीक्षा में सफल होगा ..
आप नहीं जानते पापा वैभव को !’

अगले दिन कॉलेज में नेहा जब वैभव से
मिली तो उसका मुंह लटका हुआ था..
वैभव मुस्कुराते हुए बोला
-‘क्या बात है स्वीट हार्ट..
इतना उदास क्यों हो ….
तुम मुस्कुरा दो वरना मैं अपनी जान दे दूंगा .”
नेहा झुंझलाते हुए
बोली -‘वैभव मजाक छोडो ….

पापा ने हमारे विवाह के लिए
इंकार कर दिया है …
अब क्या होगा ?
वैभव हवा में बात उडाता
हुआ बोला होगा क्या …
हम घर से भाग जायेंगे और कोर्ट
मैरिज कर वापस आ जायेंगें .”

नेहा उसे बीच में टोकते हुए बोली
पर इस सबके लिए तो पैसों की जरूरत होगी..
क्या तुम मैनेज
कर लोगे ?” ”

ओह बस यही दिक्कत है …
मैं तुम्हारे लिए जान
दे सकता हूँ पर इस वक्त मेरे पास पैसे नहीं …
हो सकता है घर से
भागने के बाद हमें कही होटल में छिपकर रहना पड़े..
तुम ऐसा करो
तुम्हारे पास और तुम्हारे घर में जो कुछ भी चाँदी -सोना-नकदी
तुम्हारे हाथ लगे तुम ले आना …
वैसे मैं भी कोशिश करूंगा …
कल को तुम घर से कहकर आना कि
तुम कॉलेज जा रही हो और यहाँ से
हम फर हो जायेंगे…

सपनों को सच करने के लिए !”
नेहा भोली बनते हुए बोली
-”पर इससे तो मेरी व् मेरे परिवार कि बहुत
बदनामी होगी ”
वैभव लापरवाही के साथ बोला
-”बदनामी वो तो होती रहती है …
तुम इसकी परवाह मत करो..”
वैभव इससे आगे
कुछ कहता उससे पूर्व ही नेहा ने उसके गाल पर जोरदार तमाचा
रसीद कर दिया..

नेहा भड़कते हुयी बोली
-”हर बात पर जान देने को तैयार बदतमीज़ तुझे ये तक
परवाह नहीं जिससे तू प्यार करता
है उसकी और उसके परिवार की समाज में बदनामी हो ….
प्रेम का दावा करता है…
बदतमीज़ ये जान ले कि मैं वो अंधी
प्रेमिका नहीं जो पिता की इज्ज़त की धज्जियाँ उड़ा कर
ऐय्याशी करती फिरूं .कौन से सपने सच हो जायेंगे ….

जब मेरे भाग जाने पर मेरे पिता जहर खाकर प्राण दे देंगें !
मैं अपने पिता की इज्ज़त नीलाम कर तेरे साथ भाग जाऊँगी
तो समाज में और ससुराल में मेरी बड़ी इज्ज़त होगी …
वे अपने सिर माथे पर बैठायेंगें…

और सपनों की दुनिया इस समाज से कहीं इतर होगी…
हमें रहना तो इसी समाज में हैं …
घर से भागकर क्या आसमान में रहेंगें ?
है कोई जवाब तेरे पास..

पीछे से ताली की आवाज सुनकर
वैभव ने मुड़कर देखा तो पहचान न पाया..
नेहा दौड़कर उनके पास
चली गयी और आंसू पोछते हुए बोली -‘
पापा आप ठीक कह रहे थे
ये प्रेम नहीं केवल जाल है जिसमे फंसकर मुझ जैसी हजारों
लडकियां अपना जीवन बर्बाद कर डालती हैं !!”

 

#मैं_भी_स्कूल_में_जाऊंगी
पापा मुझको बस्ता ला दो
मैं भी स्कूल में जाऊंगी।
A B C D पढूंगी मैं भी
क ख ग भी पढ़ कर आऊंगी।
सीखूंगी बातें नयी और
आकर सब को बताऊंगी।
पापा मुझको बस्ता ला दो
मैं भी स्कूल में जाऊंगी।।
पढ़ लिख कर इक दिन मैं भी
नाम बहुत ही कमाऊंगी।
होगा गर्व तुझे उस दिन
जब नाम तेरा रोशन कर जाऊंगी।
इंदिरा, कल्पना जैसी बन कर
इस जग में मैं छा जाऊंगी।
पापा मुझको बस्ता ला दो
मैं भी स्कूल में जाऊंगी।।
आज पढूंगी मैं जो तो
कल मैं भी सबको पढ़ाऊंगी।
पंख लगा दो ऊँची उड़ान को
सारे जग में छा जाउंगी।।
आने वाले कल को मैं
इस घर की शान बढ़ाऊँगी।।
पापा मुझको बस्ता ला दो
मैं भी स्कूल में जाऊंगी।।

Father’s Shoes Heart Touching Emotional Story in Hindi pasandaaye to social share sites par share kare

 

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