hello freind aaj me jai shree ram status in hindi me share kar raha hu ham sabhi ram bhakt hai to aise me kuch jai shree ram ke katter hindu status ka collection laker aaya hu jo ki bhagwan shri ram ke best aut top status hai Jai Shree Ram Sms Attitude Shayari Status Messages ko aap whatsapp aur facebooka jaise others sites par share kar sakte hai jai shree ram ke status ko aap ram nam nare me istemal kar sakte hai Jai Shree Ram Sms Attitude Status Shayari in Hindi aaj me aapke samne share karne wala hu so jante hai Sms Attitude Status Shayari Lines ke bare me jo niche di gayi hai jinko copy karke aap istemal kar sakte hai

ai Shree Ram Whatsapp & Facebook Status

Jai Shree Ram Whatsapp & Facebook Status

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’•,,•’ जो राम का भक्त होगा तो जरूर सेयर करे

Jai Shree Ram Status in Hindi

🚩🚩रक्त नहीं वो पानी है 🚩🚩
🚩🚩जो श्रीराम ना बोले वो🚩🚩
🚩पकिस्तानी 🚩हैं
बोलो ” 🚩🚩जय श्री राम “🚩🚩

Jai Shri Ram Wishes Sms

मोर की खूबसूरती पंख से होती है उसी तरह

हमारी खूबसूरती श्रीराम के भगवा रंग से होती है
🚩#जयश्रीराम🚩

Jai Shree Ram Attitude SMS in Hindi

🚩 हमे ढून्ड़ना इतना भी मुश्किल नही हैं.. दोस्तो,
बस जहाँ #जयश्रीराम के जयकारे लग रहे हो उसी जगह आ जाना | 🚩

🚩 जय श्री राम 🚩

 

जय श्री राम हिंदी स्टेटस

जंगल मे छाती चोडी करके
शेर चला करते हैं , 🚩
ओर हिन्दूस्तान में छाती चोडी करके
रामभक्त चला करते हैं …🚩

🚩🚩 #जयश्रीराम🚩🚩

 

जय श्री राम ऐटिटूड स्टेटस इन हिंदी

🚩आँख उठाए जो कोई हिन्दुस्तान की ओर,
वह आँख ही फोड़ दूंगा।
जो मौका मिला,
भारत तो क्या पाकिस्तान की हर मस्जित पर #भगवा गाड़ दूंगा।
🚩हर हर महादेव 🚩 Jai Siri Ram🚩

 

जय श्री राम status in hindi

🚩🚩#फतवा नहीं बस #भगवा 🚩 🚩
का नाम _होगा,

मेरे #देश में अब सलाम नहीं
#सिर्फजय #🚩🚩#श्रीराम 🚩🚩होगा।
🚩🚩जय श्री राम🚩🚩

राम शायरी इन हिंदी

🚩🚩 हो गया रण शंखनाद,
अब तांडव मचाना हैं 🚩🚩
जातियों में न बटना हिन्दूवीरों🚩
🚩🚩हमें हिन्दूराष्ट्र बनाना है 🚩🚩
🚩🚩जय श्री राम 🚩🚩

राम हनुमान शायरी

ram status

🚩गली गली मे ऐलान होना चाहिए🚩
🚩हर मन्दिर मे #राम होना चाहिए🚩
🚩इतना तो गुणगान होना चाहिए,🚩
🚩मिले किसी से तो जय $hree राम होना चाहिए,,🚩
🚩(जय $hree राम)🚩

राम पर शायरी

🚩कौंन कहता हैं की
मौत सामने आयेगे तो हम डर जायेगे
🚩लंका तक चलने वाले राम के
दीवाने हैं मौत को भी
🚩जय श्री राम🚩
कहके निकल जायेगे

🏹🚩जय श्री राम🚩

 

हिंदुत्व स्टेटस

🚩🚩 हो गया रण शंखनाद,
अब तांडव मचाना हैं 🚩🚩
जातियों में न बटना हिन्दूवीरों🚩
🚩🚩हमें हिन्दूराष्ट्र बनाना है 🚩🚩
🚩🚩जय श्री राम 🚩🚩

भगवा स्टेटस इन हिंदी

भाईयो आज आराम लेलो
कल ईद है कल फ़ीर अपने स्टेटस पर भगवा लहराना होगा ज्यादा से ज्यादा प्रोफ़ाइल रखे ओर पूरे भारत मे भगवा लहराना है अपने3 स्टेटस पर हिन्दुगिरी वाले स्टेटस रखे मेरे मेसेज को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे धन्यवाद अपना राजस्थान हिन्दुगिरी में नम्बर1 पर है भाइयो इसी तरह बरकरार रखे अपने हिंदुत्व को🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

 

भगवा राज स्टेटस इन हिंदी

कल ऐसा नही लगना चाहिए कि ईद है बल्कि ऐसा लगना चाहिए जैसे भगवादिवस या राम नवमी हो
जय हो आयोध्या के राजा की
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

राम शायरी इन हिंदी

सीने में #भगवा🚩मुँह पे #जयश्रीराम
दिल मे #भारत और
दिमाग मे #राष्ट्रभक्ति
🚩🚩#जय_जय_श्री_राम🚩🚩
Jai shree ram bhaiyo…..
Jai mahakal…..

राम भक्त स्टेटस

सीने में #भगवा🚩मुँह पे #जयश्रीराम दिल मे #

भारत और दिमाग मे #राष्ट्रभक्ति 🚩

#जय_जय_श्री_राम🚩

 

राम हनुमान शायरी

छोड़ो हिन्दुओ जय श्री राम बोलो👏⛳
सच्चें हिन्दुभक्त शहमत है तो ज्यादा से ज्यादा सेयर करें👍

 

निरन्तर पोस्ट पढ़े श्रीराम नाम की महिमा🙏
पूरा पढियेगा जरूर श्रद्धालुओं अध्यात्म की बाते 👇
पसन्द आने पर गर्व से श्रद्धा से सेयर जरूर करियेगा💓🙏
🌺राम नाम की महिमा🌺

 

kattar hindu jai shree ram status in hindi History

एक संत महात्मा श्यामदासजी रात्रि के समय में ‘श्रीराम’ नाम का अजपाजाप करते हुए अपनी मस्ती में चले जा रहे थे। जाप करते हुए वे एक गहन जंगल से गुज़र रहे थे।
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विरक्त होने के कारण वे महात्मा बार-बार देशाटन करते रहते थे। वे किसी एक स्थान में अधिक समय नहीं रहते थे। वे इश्वर नाम प्रेमी थे। इस लिये दिन-रात उनके मुख से राम नाम जप चलता रहता था। स्वयं राम नाम का अजपाजाप करते तथा औरों को भी उसी मार्ग पर चलाते।
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श्यामदासजी गहन जंगल में मार्ग भूल गये थे पर अपनी मस्ती में चले जा रहे थे कि जहाँ राम ले चले वहाँ….। दूर अँधेरे के बीच में बहुत सी दीपमालाएँ प्रकाशित थीं। महात्मा जी उसी दिशा की ओर चलने लगे।
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निकट पहुँचते ही देखा कि वटवृक्ष के पास अनेक प्रकार के वाद्ययंत्र बज रहे हैं, नाच -गान और शराब की महफ़िल जमी है। कई स्त्री पुरुष साथ में नाचते-कूदते-हँसते तथा औरों को हँसा रहे हैं। उन्हें महसूस हुआ कि वे मनुष्य नहीं प्रेतात्मा हैं।
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श्यामदासजी को देखकर एक प्रेत ने उनका हाथ पकड़कर कहाः ओ मनुष्य ! हमारे राजा तुझे बुलाते हैं, चल। वे मस्तभाव से राजा के पास गये जो सिंहासन पर बैठा था। वहाँ राजा के इर्द-गिर्द कुछ प्रेत खड़े थे।
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प्रेतराज ने कहाः तुम इस ओर क्यों आये ? हमारी मंडली आज मदमस्त हुई है, इस बात का तुमने विचार नहीं किया ? तुम्हें मौत का डर नहीं है ?
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अट्टहास करते हुए महात्मा श्यामदासजी बोलेः मौत का डर ? और मुझे ? राजन् ! जिसे जीने का मोह हो उसे मौत का डर होता हैं। हम साधु लोग तो मौत को आनंद का विषय मानते हैं। यह तो देहपरिवर्तन हैं जो प्रारब्धकर्म के बिना किसी से हो नहीं सकता।
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प्रेतराजः तुम जानते हो हम कौन हैं ?
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महात्माजीः मैं अनुमान करता हूँ कि आप प्रेतात्मा हो।
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प्रेतराजः तुम जानते हो, लोग समाज हमारे नाम से काँपता हैं।
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महात्माजीः प्रेतराज ! मुझे मनुष्य में गिनने की ग़लती मत करना। हम ज़िन्दा दिखते हुए भी जीने की इच्छा से रहित, मृततुल्य हैं।
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यदि ज़िन्दा मानो तो भी आप हमें मार नहीं सकते। जीवन-मरण कर्माधीन हैं। मैं एक प्रश्न पूछ सकता हूँ ?
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महात्मा की निर्भयता देखकर प्रेतों के राजा को आश्चर्य हुआ कि प्रेत का नाम सुनते ही मर जाने वाले मनुष्यों में एक इतनी निर्भयता से बात कर रहा हैं। सचमुच, ऐसे मनुष्य से बात करने में कोई हरकत नहीं।
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प्रेतराज बोलाः पूछो, क्या प्रश्न है ?
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महात्माजीः प्रेतराज ! आज यहाँ आनंदोत्सव क्यों मनाया जा रहा है ?
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प्रेतराजः मेरी इकलौती कन्या, योग्य पति न मिलने के कारण अब तक कुआँरी हैं। लेकिन अब योग्य जमाई मिलने की संभावना हैं। कल उसकी शादी हैं इसलिए यह उत्सव मनाया जा रहा हैं।
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महात्मा (हँसते हुए): तुम्हारा जमाई कहाँ हैं ? मैं उसे देखना चाहता हूँ।”
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प्रेतराजः जीने की इच्छा के मोह के त्याग करने वाले महात्मा ! अभी तो वह हमारे पद (प्रेतयोनी) को प्राप्त नहीं हुआ हैं। वह इस जंगल के किनारे एक गाँव के श्रीमंत (धनवान) का पुत्र है।
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महादुराचारी होने के कारण वह इसवक्त भयानक रोग से पीड़ित है। कल संध्या के पहले उसकी मौत होगी। फिर उसकी शादी मेरी कन्या से होगी। इस लिये रात भर गीत-नृत्य और मद्यपान करके हम आनंदोत्सव मनायेंगे।
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श्यामदासजी वहाँ से विदा होकर श्रीराम नाम का अजपाजाप करते हुए जंगल के किनारे के गाँव में पहुँचे। उस समय सुबह हो चुकी थी। एक ग्रामीण से महात्मा नें पूछा “इस गाँव में कोई श्रीमान् का बेटा बीमार हैं ?”
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ग्रामीणः हाँ, महाराज ! नवलशा सेठ का बेटा सांकलचंद एक वर्ष से रोगग्रस्त हैं। बहुत उपचार किये पर उसका रोग ठीक नहीं होता।
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महात्मा नवलशा सेठ के घर पहुंचे सांकलचंद की हालत गंभीर थी। अन्तिम घड़ियाँ थीं फिर भी महात्मा को देखकर माता-पिता को आशा की किरण दिखी। उन्होंने महात्मा का स्वागत किया।
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सेठपुत्र के पलंग के निकट आकर महात्मा रामनाम की माला जपने लगे। दोपहर होते-होते लोगों का आना-जाना बढ़ने लगा।
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महात्मा: क्यों, सांकलचंद ! अब तो ठीक हो ?
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सांकलचंद ने आँखें खोलते ही अपने सामने एक प्रतापी संत को देखा तो रो पड़ा। बोला “बापजी ! आप मेरा अंत सुधारने के लिए पधारे हो।
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मैंने बहुत पाप किये हैं। भगवान के दरबार में क्या मुँह दिखाऊँगा ? फिर भी आप जैसे संत के दर्शन हुए हैं, यह मेरे लिए शुभ संकेत हैं।” इतना बोलते ही उसकी साँस फूलने लगी, वह खाँसने लगा।
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“बेटा ! निराश न हो भगवान राम पतित पावन है। तेरी यह अन्तिम घड़ी है। अब काल से डरने का कोई कारण नहीं। ख़ूब शांति से चित्तवृत्ति के तमाम वेग को रोककर श्रीराम नाम के जप में मन को लगा दे। अजपाजाप में लग जा। शास्त्र कहते हैं-
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चरितम् रघुनाथस्य शतकोटिम् प्रविस्तरम्।
एकैकम् अक्षरम् पूण्या महापातक नाशनम्।।
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अर्थातः सौ करोड़ शब्दों में भगवान राम के गुण गाये गये हैं। उसका एक-एक अक्षर ब्रह्महत्या आदि महापापों का नाश करने में समर्थ हैं।
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दिन ढलते ही सांकलचंद की बीमारी बढ़ने लगी। वैद्य-हकीम बुलाये गये। हीरा भस्म आदि क़ीमती औषधियाँ दी गयीं। किंतु अंतिम समय आ गया यह जानकर महात्माजी ने थोड़ा नीचे झुककर उसके कान में रामनाम लेने की याद दिलायी।
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राम बोलते ही उसके प्राण पखेरू उड़ गये। लोगों ने रोना शुरु कर दिया। शमशान यात्रा की तैयारियाँ होने लगीं। मौक़ा पाकर महात्माजी वहाँ से चल दिये।
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नदी तट पर आकर स्नान करके नामस्मरण करते हुए वहाँ से रवाना हुए। शाम ढल चुकी थी। फिर वे मध्यरात्रि के समय जंगल में उसी वटवृक्ष के पास पहुँचे। प्रेत समाज उपस्थित था।
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प्रेतराज सिंहासन पर हताश होकर बैठे थे। आज गीत, नृत्य, हास्य कुछ न था। चारों ओर करुण आक्रंद हो रहा था, सब प्रेत रो रहे थे।
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महात्मा ने पूछा “प्रेतराज ! कल तो यहाँ आनंदोत्सव था, आज शोक-समुद्र लहरा रहा हैं। क्या कुछ अहित हुआ हैं ?”
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प्रेतराजः हाँ भाई ! इसीलिए रो रहे हैं। हमारा सत्यानाश हो गया। मेरी बेटी की आज शादी होने वाली थी। अब वह कुँआरी रह जायेगी
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महात्मा: प्रेतराज ! तुम्हारा जमाई तो आज मर गया हैं। फिर तुम्हारी बेटी कुँआरी क्यों रही ?
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प्रेतराज ने चिढ़कर कहाः तेरे पाप से। मैं ही मूर्ख हूँ कि मैंने कल तुझे सब बता दिया। तूने हमारा सत्यानाश कर दिया।
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महात्मा ने नम्रभाव से कहाः मैंने आपका अहित किया यह मुझे समझ में नहीं आता। क्षमा करना, मुझे मेरी भूल बताओगे तो मैं दुबारा नहीं करूँगा।
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प्रेतराज ने जलते हृदय से कहाः यहाँ से जाकर तूने मरने वाले को #रामनाम स्मरण का मार्ग बताया और अंत समय भी राम नाम कहलवाया। इससे उसका उद्धार हो गया और मेरी बेटी कुँआरी रह गयी।
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महात्माजीः क्या ? सिर्फ़ एक बार नाम जप लेने से वह प्रेतयोनि से छूट गया ? आप सच कहते हो ?
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प्रेतराजः हाँ भाई ! जो #मनुष्य
राम_नामजप करता हैं वह राम नामजप के प्रताप से कभी हमारी योनि को प्राप्त नहीं होता। भगवन्नाम जप में नरकोद्धारिणी शक्ति हैं।
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प्रेत के द्वारा रामनाम का यह प्रताप सुनकर महात्माजी प्रेमाश्रु बहाते हुए भाव समाधि में लीन हो गये। उनकी आँखे खुलीं तब वहाँ प्रेत-समाज नहीं था, बाल सूर्य की सुनहरी किरणें वटवृक्ष को शोभायमान कर रही थीं।
जय सियाराम शिवशिष्य पेज़👍 बोलो जय जय श्रीराम⛳
🌺👇निरन्तर पढ़ें श्री #हनुमानजी के बारे में 👇🌺
आज मंगलवार पर बिशेस जानकारियों से आप सभी को हम अवगत कराने जा रहे है⛳
आप भी सहयोग करे पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा सेयर करें🙏
🕉🙇‍♀🚩ऊँ श्री हनुमते नम:🚩🙇‍♀🕉🌸🌌शुभ दिन मंगलवार🌸🏵🚩(श्री हनुमान चालीसा भावार्थ एवं गूढार्थ सहित भाग-3⃣1⃣)🚩🏵चौपाई:-अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन्ह जानकी माता॥*अर्थ :-हे हनुमंत लालजी आपको माताश्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुवा है,
जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां (सब प्रकार की सम्पत्ति) दे सकते हैं।
*गूढार्थ :-* तुलसीदासजी लिखते है कि हनुमानजी अपने भक्तो को आठ प्रकार की सिद्धयाँ तथा नौ प्रकार की निधियाँ प्रदान कर सकते हैं ऐसा सीतामाता ने उन्हे वरदान दिया।
जिन साधक में सेवा की तल्लीनता एवं तत्परता हो, जो राम जी के कार्य को सम्पादित करने में ही अपने जन्म की सार्थकता और सफलता समझता हो, उसके लिए फिर किसी भी प्रकार की शक्ति, संपत्ति, भक्ति अथवा मुक्ति असंभव नहीं रह जाती।
भगवान श्रीराम ने हनुमानजी को प्रसन्न होकर आलिंगन दिया और सीताजी ने उन्हे *‘अष्ट सिद्ध नव निधि के दाता’* का वर प्रदान किया।
सच्चे साधक की सेवा के लिए सिद्धियाँ अपने आप सदैव तैयार रहती है।
यौगिक सिद्धियाँ आठ प्रकार की हैं।
*1.अणिमा, 2.महिमा, 3.गरिमा, 4.लघिमा, 5.प्राप्ति, 6.प्राकाम्य, 7.ईशित्व और 8.वशित्व।*
यह अष्ट सिद्धियां बड़ी ही चमत्कारिक होती है, इन अष्टसिद्धियों ने राम-कार्य-सम्पादन में हनुमानजी को सहायता प्रदान की।
*1.अणिमा :-* इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं।
*2. महिमा :-* इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी ने कई बार विशाल रूप धारण किया है।
*3. गरिमा :-* इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी स्वयं का भार किसी विशाल पर्वत के समान कर सकते हैं।
*4. लघिमा :-* इस सिद्धि से हनुमानजी स्वयं का भार बिल्कुल हल्का कर सकते हैं और पलभर में वे कहीं भी आ-जा सकते हैं।
*5. प्राप्ति :-* इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी किसी भी वस्तु को तुरंत ही प्राप्त कर लेते हैं।
पशु-पक्षियों की भाषा को समझ लेते हैं, आने वाले समय को देख सकते हैं।
*6. प्राकाम्य :-* इसी सिद्धि की मदद से हनुमानजी पृथ्वी गहराइयों में पाताल तक जा सकते हैं, आकाश में उड़ सकते हैं और मनचाहे समय तक पानी में भी जीवित रह सकते हैं।
*7. ईशित्व :-* इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी को दैवीय शक्तियां प्राप्त हुई हैं।
*8. वशित्व :-* इस सिद्धि के प्रभाव से हनुमानजी जितेंद्रिय हैं और मन पर नियंत्रण रखते हैं।
तुलसीदासजी ने जिन नौ निधियों का वर्णनकि या है वह इस प्रकार है:-
*1. पद्म निधि :-* पद्मनिधि लक्षणो से संपन्न मनुष्य सात्विक होता है तथा स्वर्ण चांदी आदि का संग्रह करके दान करता है।
*2. महापद्म निधि :-* महाप निधि से लक्षित व्यक्ति अपने संग्रहित धन आदि का दान धार्मिक जनों में करता है।
*3. नील निधि :-* निल निधि से सुशोभित मनुष्य सात्विक तेज से संयुक्त होता है, उसकी संपति तीन पीढी तक रहती है।
*4. मुकुंद निधि :-* मुकुन्द निधि से लक्षित मनुष्य रजोगुण संपन्न होता है वह राज्यसंग्रह में लगा रहता है।
*5. नन्द निधि :-* नन्दनिधि युक्त व्यक्ति राजस और तामस गुणों-वाला होता है वही कुल का आधार होता है।
*6. मकर निधि :-* मकर निधि संपन्न पुरुष अस्त्रों का संग्रह करने-वाला होता है।
*7. कच्छप निधि :-* कच्छप निधि लक्षित व्यक्ति तामस गुणवाला होता है वह अपनी संपत्ति का स्वयं उपभोग करता है।
*8. शंख निधि :-* शंख निधि एक पीढी के लिए होती है।
*9. खर्व (मिश्र) निधि :-* खर्व निधि वाले व्यक्ति के स्वभाव में मिश्रीत फल दिखाई देते हैं।
परमात्मा के प्रसाद बिना सिद्धि नहीं पायी जा सकती अर्थात् साधक को भगवान का हाथ चाहिए।
भगवान हमारा हाथ पकडे इसलिए हमारे हाथ में भी कुछ होना चाहिए।
हमारा जीवन ऐसा होना चाहिए कि उसे देखकर भगवान प्रसन्न हो जाएं।
हमारी बुद्धि, हमरा मन ऐसे बनने चाहिए कि उन्हे देखकर भगवान खुश हो जाएं।
एक बार भगवान के बन गये तो फिर साधक को सिद्धि और संपत्ति का मोह नहीं रहता, उसका लक्ष्य केवल भगवद् प्राप्ति होता है।
कुछ लोग केवल सिद्धि प्राप्त करने के चक्कर में अपना संपूर्ण जीवन समाप्त कर देते है।
एक बार तुकाराम महाराज को नदी पार करनी थी, उन्होने नाविक को दो पैसे दिये और नदी पार की और भगवान पांडुरंग के दर्शन किये।
थोडी देर के बाद वहाँ एक हठयोगी आया उसने नांव में न बैठकर हठयोग की प्रक्रिया से नदी पार की।
उसके बाद उसने तुकाराम महाराज से पूछा, *‘क्या तुमने मेरी योगशक्ति देखी?’*
तुकाराम महाराज ने कहा हाँ, तुम्हारी योग शक्ति मैने देखी मगर उसकी कीमत केवल दो पैसे हैै।
यह सुनकर हठयोगी गुस्से में आ गया, उसने कहा, तुम मेरी योग शक्ति की कीमत केवल दो पैसे गिनते हो?
तब तुकाराम महाराज ने कहा, हाँ मुझे नदी पार करनी थी, मैने नाविक को दो पैसे दिये और उसने नदी पार करा दी।
जो काम दो पैसे से होता है वही काम की सिद्धि के लिए तुमने इतने वर्ष बरबाद किये इसलिए उसकी कीमत दो पैसे मैने कही।
कहने का तात्पर्य हमारा लक्ष्य केवल सिद्धि प्राप्त करना नहीं बल्कि भगवद्प्राप्ति का होना चाहिए।
*’मै प्रभु का प्रिय (लाडला) कैसे बनुं’* इसका विचार होना चाहिए उसके लिए प्रयत्न करना चाहिए।
भगवान का लाडला बनना हो तो मन पूर्णत: भगवान को देना होगा।
समपर्णात्मक जीवन, समपर्णात्मक कर्म और सुन्दर (मधुर) जीवन यह अध्यात्म है।
यह अध्यात्म यदि ईशसंस्थ होगा तथा तुम यदि भगवान का आश्रय लोगे और इस रास्ते पर आगे बढोगे तो ही विकास होगा, *’अष्ट सिद्धि नौ निधि’* मिलेगी।

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